जैन धर्म • तीर्थक्षेत्र

Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Bada Padampura

Jaipur, Rajasthan
पदमपुरा दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र राजस्थान के जयपुर जिले के शिवदासपुरा में स्थित एक प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल है। यह जयपुर-कोटा मार्ग पर जयपुर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मान्यता के अनुसार, वैशाख शुक्ल पंचमी, संवत 2001 (1944 ई.) को मूला जाट नामक एक व्यक्ति अपने घर की नींव खोद रहा था। इसी दौरान भूमि से एक प्राचीन पाषाण प्रतिमा प्राप्त हुई। विशेषज्ञों द्वारा इस प्रतिमा की पहचान जैन धर्म के छठे तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु के रूप में की गई।
प्रतिमा के प्राकट्य से इस स्थान की धार्मिक महत्ता बढ़ी और बाद में यहां पदमपुरा दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र का विकास हुआ। आज यह श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ एवं दर्शन स्थल है।

तीर्थक्षेत्र की जानकारी

संप्रदाय दिगंबर जैन
तीर्थ का प्रकार अतिशय तीर्थ
पता Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra
Padampura, Tahsil : Chaksu, District : Jaipur, State : RAJASTHAN, Country : India, Pincode : 303903

इतिहास

वर्ष 1945 में मूला जाट के घर में खुदाई के दौरान भगवान पद्मप्रभु की प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, प्रतिमा के प्रकट होने से पहले गांव में पानी की कमी और विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। प्रतिमा के प्राकट्य के बाद पानी की समस्या दूर हुई, पशुओं की मृत्यु का सिलसिला रुका और ग्रामीणों को अच्छी फसल प्राप्त हुई। इन घटनाओं के कारण इस स्थान की धार्मिक आस्था और महत्ता बढ़ती गई। श्री महोरीलालजी गोधा ने यहां संगमरमर से निर्मित एक अद्वितीय गोलाकार मंदिर के निर्माण के लिए भूमि दान की। मंदिर का शिखर लगभग 85 फीट ऊंचा है। इसकी आधारशिला अजमेर के सर सेठ श्री भागचंदजी सोनी द्वारा रखी गई थी। मुख्य मंदिर के मध्य ऊंची वेदी पर भगवान पद्मप्रभु की सुंदर प्रतिमा विराजमान है। परिसर में अन्य मंदिर भी हैं, जिनमें भगवान बाहुबली, भगवान महावीर, भगवान पद्मप्रभु, भगवान ऋषभदेव और भगवान नमिनाथ सहित विभिन्न तीर्थंकरों एवं जैन आराध्य देवों की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मुख्य मंदिर के सामने खुले परिसर में भगवान पद्मप्रभु की लगभग 27 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां वैशाख शुक्ल पंचमी और फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी को वार्षिक आयोजन होते हैं। दशहरा (विजयादशमी) के अवसर पर वार्षिक जुलूस और मुख्य समारोह का आयोजन किया जाता है।

मुख्य मंदिर एवं प्रतिमाएँ

मूलनायक श्री पद्म प्रभु भगवान
चमत्कारों का स्थान

यह तीर्थक्षेत्र क्यों प्रसिद्ध है?

पदमपुरा मंदिर उत्तर भारत के प्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यह स्थान अपनी धार्मिक आस्था और यहां से जुड़ी विभिन्न मान्यताओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। जैन श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन और प्रार्थना करने से मानसिक एवं शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है। क्षेत्रपाल देव के प्रति भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है और मान्यता है कि उनकी आराधना से नकारात्मक प्रभावों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

उपलब्ध सुविधाएँ

✓ धर्मशाला
✓ भोजनशाला
✓ पार्किंग
✓ पेयजल
✓ स्नान व्यवस्था
✓ साधु-साध्वी निवास
✓ पुस्तकालय
✓ बगीचा / उद्यान
✓ शौचालय
✓ चिकित्सा सुविधा

अधिक जानकारी

भोजनालय

यात्रियों को शुद्ध, सात्विक एवं उचित मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराने हेतु वैषाली यात्री निवास परिसर में क्षेत्र कमेटी द्वारा भोजनालय संचालित किया जा रहा है। यहाँ एक साथ लगभग 400 यात्री भोजन कर सकते हैं।

भोजनालय में जैन आचार-विचार, भक्ष्य-अभक्ष्य एवं शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। रात्रि भोजन का निषेध है। अष्टमी एवं चतुर्दशी को हरी सब्जियों का उपयोग नहीं किया जाता तथा आलू, प्याज, लहसुन एवं अन्य जमीकंद आदि का प्रयोग नहीं होता।

भोजनालय में RO जल, आधुनिक रसोई उपकरण तथा भोजन को गरम रखने की व्यवस्था है। यात्रियों को प्रतिदिन मिठाई, नमकीन, फुलके, मिस्सी रोटी, चावल, दाल, दो सब्जियाँ, रायता, पापड़ एवं चटनी/अचार उपलब्ध कराया जाता है।

भोजनालय का समय:

  • प्रातः: 10:00 बजे से 1:30 बजे तक
  • सायं: 5:00 बजे से सूर्यास्त तक

सुरूचि अल्पाहार गृह

कटला परिसर में मंदिरजी के पूर्वी भाग में यात्रियों की सुविधा हेतु क्षेत्र कमेटी द्वारा “सुरूचि अल्पाहार गृह” का संचालन न लाभ, न हानि के आधार पर किया जाता है।

यहाँ जैन आचार-विचार के अनुसार दूध, चाय, जलेबी, मठरी, दाल की कचोरी, पोहे, मक्खन बड़ा, लड्डू आदि नाश्ता उपलब्ध रहता है। दोपहर 3:00 बजे चाय तथा रात्रि में केसरयुक्त गरम दूध भी उपलब्ध रहता है।

अल्पाहार गृह का समय:

  • प्रातः: 6:00 बजे से 11:00 बजे तक
  • दोपहर: 2:00 बजे से 5:00 बजे तक
  • रात्रि: 6:00 बजे से 10:00 बजे तक