मान्यता के अनुसार, वैशाख शुक्ल पंचमी, संवत 2001 (1944 ई.) को मूला जाट नामक एक व्यक्ति अपने घर की नींव खोद रहा था। इसी दौरान भूमि से एक प्राचीन पाषाण प्रतिमा प्राप्त हुई। विशेषज्ञों द्वारा इस प्रतिमा की पहचान जैन धर्म के छठे तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु के रूप में की गई।
प्रतिमा के प्राकट्य से इस स्थान की धार्मिक महत्ता बढ़ी और बाद में यहां पदमपुरा दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र का विकास हुआ। आज यह श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ एवं दर्शन स्थल है।
तीर्थक्षेत्र की जानकारी
Padampura, Tahsil : Chaksu, District : Jaipur, State : RAJASTHAN, Country : India, Pincode : 303903
इतिहास
मुख्य मंदिर एवं प्रतिमाएँ
यह तीर्थक्षेत्र क्यों प्रसिद्ध है?
उपलब्ध सुविधाएँ
अधिक जानकारी
भोजनालय
यात्रियों को शुद्ध, सात्विक एवं उचित मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराने हेतु वैषाली यात्री निवास परिसर में क्षेत्र कमेटी द्वारा भोजनालय संचालित किया जा रहा है। यहाँ एक साथ लगभग 400 यात्री भोजन कर सकते हैं।
भोजनालय में जैन आचार-विचार, भक्ष्य-अभक्ष्य एवं शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। रात्रि भोजन का निषेध है। अष्टमी एवं चतुर्दशी को हरी सब्जियों का उपयोग नहीं किया जाता तथा आलू, प्याज, लहसुन एवं अन्य जमीकंद आदि का प्रयोग नहीं होता।
भोजनालय में RO जल, आधुनिक रसोई उपकरण तथा भोजन को गरम रखने की व्यवस्था है। यात्रियों को प्रतिदिन मिठाई, नमकीन, फुलके, मिस्सी रोटी, चावल, दाल, दो सब्जियाँ, रायता, पापड़ एवं चटनी/अचार उपलब्ध कराया जाता है।
भोजनालय का समय:
- प्रातः: 10:00 बजे से 1:30 बजे तक
- सायं: 5:00 बजे से सूर्यास्त तक
सुरूचि अल्पाहार गृह
कटला परिसर में मंदिरजी के पूर्वी भाग में यात्रियों की सुविधा हेतु क्षेत्र कमेटी द्वारा “सुरूचि अल्पाहार गृह” का संचालन न लाभ, न हानि के आधार पर किया जाता है।
यहाँ जैन आचार-विचार के अनुसार दूध, चाय, जलेबी, मठरी, दाल की कचोरी, पोहे, मक्खन बड़ा, लड्डू आदि नाश्ता उपलब्ध रहता है। दोपहर 3:00 बजे चाय तथा रात्रि में केसरयुक्त गरम दूध भी उपलब्ध रहता है।
अल्पाहार गृह का समय:
- प्रातः: 6:00 बजे से 11:00 बजे तक
- दोपहर: 2:00 बजे से 5:00 बजे तक
- रात्रि: 6:00 बजे से 10:00 बजे तक