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श्री शांतिनाथ भगवान स्तवन

Shri Shantinath Bhagvan Stavan By Ankit Jain
This Stavan is dedicated to Bhagwan Shri Shantinath, the 16th Tirthankar. Lyrics by Ankit Bakliwal,
Article | 3 Oct 2026

श्री शांतिनाथ चरणन ध्यान धरि।
करूँ वंदना हाथ जोड़॥
वीतराग प्रभु शांति स्वरूप।
नमन करूँ मैं बारम्बार॥

जय जय श्री शांतिनाथ स्वामी। जग के हो तुम मंगलकारी॥
वीतराग की ज्योति निराली।जग में महिमा सबसे न्यारी॥
हस्तिनापुर शुभ जन्म तुम्हारा। जग में फैला तेज तुम्हारा॥
विश्वसेन के राज दुलारे। माता अचीरा नैनन तारे॥
बाल रूप अति तेज तुम्हारा। देखे हरषे सकल संसारा॥
मृग चिन्ह तेरी शोभा न्यारी। गावे जग नर-नारी सारी॥
पंचम चक्रवर्ती कहलाए। छः खण्डों पर ध्वज फहराए॥
रत्न, विभव, वैभव अपारा। फिर भी न बंधा मन तुम्हारा॥
क्षणभंगुर संसार बिचारा। आतम सुख को सत्य संवारा॥
राज मुकुट इक ओर धराया। संयम पथ हृदय अपनाया॥
देव, इन्द्र सब दर्शन को आए। मंगल गीत अनूपम गाए॥
दिव्य सुमन अम्बर से बरसे। जय-जयकार दिशाओं में बरसे॥
केशलोंच कर दीक्षा धारी। संयम शोभा लागे न्यारी॥
वन उपवन तप दीप जलाया। कर्म अंधेरा दूर भगाया॥
शीत, तपन, वर्षा सम मानी। अडिग रही अंतर की वाणी॥
मधुर वचन सबको समझाए। आतम पथ पर पग बढ़वाए॥
केवलज्ञान प्रभु ने पाया। ज्ञान सूर्य जग में चमकाया॥
दिव्य समवसरण शोभा पाई। जिनवाणी जग में फैलायी॥
देव, मनुज, तिर्यंच सब आए। एक समान सुधा सब पाए॥
सम्मेद गिरि शुभ मोक्ष पधारे। सिद्ध पद विराजे जिनराज हमारे॥
शांतिनाथ प्रभु नाम तुम्हारा। शांति बने जीवन की धारा॥
वीतराग जिनराज हमारे। निर्मल हों सब भाव हमारे॥

बोलो श्री शांतिनाथ भगवान की — जय! शांतिनाथ भगवान की — जय!

Ankit Jain
Jain Bhajan by Ankit Jain