रागविरागी गुणअनुरागी मोक्षप्रदायक दिव्य विधान
पंचपरमेष्ठी गुणवंदित! जगवंदित मंगलधाम
जय नमोकार ! मंगलकार! शत-शत तुझे प्रणाम!
पंच परमेष्ठी के, पावन गुण का, जग में शुभ गुणगान रहे।
अनादि अनंत, अमर वाणी का, युग-युग तक सम्मान रहे।
राग मिटाए, द्वेष हटाए, अंतर का अंधकार हरे।
पावन नमोकार मंत्र सदा, हर जीवन का उद्धार करे॥
सत्य अहिंसा, क्षमा तपस्या, जीवन के आधार बने।
समता संयम, दया करुणा, हर मन का श्रृंगार बने।
अरिहंत, सिद्ध, आचार्य वंदन, उपाध्याय, साधु नाम।
पंच परम के पावन चरणों को, करता जग प्रणाम।
जिनके पावन गुण से महके, जीवन की हर शाम।
उन सबका है सार अनोखा — पावन णमोकार नाम॥
॥ णमो अरिहंताणं ॥
॥ णमो सिद्धाणं ॥
॥ णमो आयरियाणं ॥
॥ णमो उवज्झायाणं ॥
॥ णमो लोए सव्वसाहूणं ॥
एसो पंच णमोक्कारो,
सव्वपावप्पणासणो।
मंगलाणं च सव्वेसिं,
पढमं हवई मंगलं॥
जय णमोकार… मंगलकार…
आत्मप्रकाशक, मंत्र महान।
जय णमोकार… मंगलकार…
शत-शत तुझे प्रणाम॥