तीर्थक्षेत्र की जानकारी Tirthkshetra Information
कुण्डलपुर जी सिद्ध क्षेत्र मध्यप्रदेश के दमोह जिले की पटेरा तहसील में स्थित एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध जैन तीर्थ है। यह क्षेत्र अंतिम श्रुतकेवली श्रीधर केवली की निर्वाण भूमि के रूप में पूजनीय है। अर्धचन्द्राकार पर्वत पर लगभग 1500 वर्ष प्राचीन, 15 फीट ऊँची पद्मासनस्थ श्री 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान है, जिन्हें श्रद्धालु बड़े बाबा के नाम से जानते हैं। पर्वत एवं तलहटी में अनेक प्राचीन जिनालय और श्रीधर केवली के चरण स्थित हैं।
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (कुण्डलपुर) कुण्डलगिरि, कुण्डलपुर तहसील पटेरा जिला दमोह (म.प्र.) पिनकोड-470 773
इतिहास History
कुण्डलपुर की प्राचीनता श्रीधर केवली की निर्वाण भूमि होने से जुड़ी मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, भट्टारक सुरेन्द्रकीर्ति जी को पर्वत पर बड़े बाबा की प्रतिमा के दर्शन हुए, जिसके बाद प्रतिमा को उत्खनन द्वारा प्रकट कर मंदिर निर्माण की व्यवस्था की गई। बाद में राजा छत्रसाल ने बड़े बाबा के प्रति श्रद्धा से मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और विजय प्राप्त करने के पश्चात विक्रम संवत 1757 में मंदिर का निर्माण एवं पंचकल्याणक कराया। कुण्डलपुर में पर्वत और तलहटी में स्थित 61 प्राचीन जिनमंदिर इसकी समृद्ध धार्मिक एवं स्थापत्य परंपरा को दर्शाते हैं।
यह तीर्थक्षेत्र क्यों प्रसिद्ध है? Why This Tirthkshetra Is Famous
कुण्डलपुर मुख्य रूप से बड़े बाबा श्री 1008 आदिनाथ भगवान के अतिशय क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ लगभग 2400 वर्ष प्राचीन श्रीधर केवली के चरण, 61 प्राचीन जिनमंदिर तथा अनेक प्राचीन जिनप्रतिमाएँ श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षण हैं। बड़े बाबा की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमा, अर्धचन्द्राकार पर्वत और क्षेत्र से जुड़ी अतिशय की परंपराएँ इसे जैन समाज के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान प्रदान करती हैं। इसके आसपास के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल स्थित हैं।
- धार्मिक महत्व: प्रमुख जैन तीर्थस्थल होने के साथ-साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र।
- आस-पास के प्रमुख स्थल: जबलपुर, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, खजुराहो के मंदिर एवं पन्ना राष्ट्रीय उद्यान।
अतिरिक्त जानकारी Additional Information
कुण्डलपुर जी बड़े बाबा के दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो कुछ practical और धार्मिक बातों का ध्यान रखना अच्छा रहेगा
- मंदिर परिसर में शांत और मर्यादित व्यवहार रखें।
- मंदिर के नियमों एवं स्थानीय परंपराओं का पालन करें।
- प्रतिमा या मंदिर की प्राचीन संरचनाओं को स्पर्श या नुकसान न पहुँचाएँ।
- फोटोग्राफी जहाँ प्रतिबंधित हो, वहाँ फोटो न लें।
- यदि पहाड़ी के अन्य जिनालयों के दर्शन करने हैं, तो जल्दबाजी न करें और प्रत्येक मंदिर की मर्यादा का ध्यान रखें।
साथ क्या लेकर जाएँ
- पानी की बोतल और आवश्यक व्यक्तिगत दवाइयाँ।
- आरामदायक जूते/चप्पल; पहाड़ी पर चढ़ाई के लिए सुविधाजनक footwear रखें।
- धूप से बचने के लिए टोपी/गमछा और सनस्क्रीन।
- मौसम के अनुसार आरामदायक और सादे कपड़े पहनें।
- मोबाइल/कैमरा रखें तो मंदिर के नियमों के अनुसार ही उपयोग करें।
- पूजा करना हो तो पूजा सामग्री वहीं की स्थानीय व्यवस्था के अनुसार लें।
जाने से पहले
- मंदिर के दर्शन एवं पूजा के समय पहले से पता कर लें।
- अगर पहाड़ी के सभी मंदिरों के दर्शन करने हैं तो पर्याप्त समय लेकर जाएँ।
- सुबह जल्दी दर्शन करना सुविधाजनक रहता है, खासकर गर्मियों में।
कुण्डलपुर में काफी चढ़ाई और सीढ़ियाँ हैं, इसलिए बुजुर्गों के लिए पानी, आराम और चलने की क्षमता का विशेष ध्यान रखें। मंदिर में किसी विशेष पूजा, अभिषेक या आहार संबंधी नियम के लिए वहाँ की वर्तमान व्यवस्था/कमेटी के निर्देश को प्राथमिकता दें।
मुख्य आकर्षण Main Attractions
बड़े बाबा श्री 1008 आदिनाथ भगवान
15 फीट ऊँची, प्राचीन पद्मासन प्रतिमा
पर्वत एवं तलहटी में स्थित 61 प्राचीन जिनमंदिर
समय सारणी Timings
| समय / कार्य | समय |
|---|---|
| बड़े बाबा का अभिषेक | सुबह 5.00 बजे से शाम 10.00 बजे तक |
| शांतिधारा पूजन अभिषेक | प्रात: 8:00 बजे से |
| महाआरती | साय: 6.30 बजे से |
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विशेष पर्व या आयोजन के समय में परिवर्तन हो सकता है। यात्रा से पहले पुष्टि करें।
उपलब्ध सुविधाएँ Available Facilities
यात्री निवास
भोजनशाला